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सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान, राहुल गांधी बोले- हर हाल में बचाएंगे लोकतंत्र

SHIDDHANT
12 Oct 2026 12:25 AM IST
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान, राहुल गांधी बोले- हर हाल में बचाएंगे लोकतंत्र
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राहुल गांधी को CJI से मिलने का नहीं मिला समय
दिल्ली। चुनाव आयोग, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस तथा विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों के बीच सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को लेकर नई बहस सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इन मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला। इसके बावजूद राहुल गांधी की ओर से 'दिल्ली चलो' का आह्वान किए जाने की बात सामने आई है।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी कार्यवाही और राजनीतिक स्तर पर बहस जारी है। कांग्रेस इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रही है। वहीं, चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों और उसके निर्णयों की न्यायिक समीक्षा से जुड़े प्रश्न भी चर्चा में हैं।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बीच मुलाकात का सवाल
राहुल गांधी की ओर से CJI से मुलाकात का समय मांगने को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि जब किसी विषय पर न्यायालय में सुनवाई चल रही हो, तब राजनीतिक प्रतिनिधियों को अपनी बात किस प्रक्रिया के माध्यम से रखनी चाहिए।
न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों से जुड़े तर्क, दस्तावेज और आपत्तियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। राजनीतिक ज्ञापन और न्यायालय में दाखिल याचिका की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि संबंधित मुद्दे पहले से न्यायिक विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों में पक्षकार अदालत के समक्ष याचिका दाखिल कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन के आधार पर न्यायिक आदेश जारी नहीं कर सकता। हालांकि, CJI ने प्रस्तावित मार्च पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और चुनाव आयोग से सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। अदालत ने चुनाव आयोग की संबंधित शक्तियों को मान्यता दी थी। हालांकि, इससे चुनाव आयोग के हर निर्णय को न्यायिक समीक्षा से छूट नहीं मिलती।
हाल में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग के निर्णय कानून के अनुरूप होने चाहिए और गैरकानूनी पाए जाने वाले निर्णयों को निरस्त किया जा सकता है।
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान
राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की है। विपक्ष की मांगों में कथित वोट चोरी रोकना, SIR पर रोक लगाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। कांग्रेस इन मुद्दों को चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विरोध प्रदर्शन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच अंतर को चर्चा में ला दिया है। विपक्ष को अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है, जबकि लंबित मामलों पर निर्णय अदालत कानूनी दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर करती है।
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